पोरसा: यस न्यूज़ संवाददाता।खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने आज पोरसा शहर में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की सख्त जांच शुरू कर दी है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी गिरीश राजोरिया और महेंद्र सिरोहिया के नेतृत्व में विभाग की टीम ने शहर के पांच प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से सैंपल लिए, जिससे व्यापारी वर्ग में हड़कंप मच गया।आज की इस कार्रवाई में पंकज मिष्ठान भंडार से पेड़ा और बेसन के लड्डू का सैंपल लिया गया, संजय कुमार सुरेश चंद्र मिष्ठान भंडार से मावा पेड़ा और बेसन के लड्डू के सैंपल लिए गए। इसके बाद टीम ने शगुन किराना स्टोर से बेसन और घी का सैंपल लिया।साथ ही, बांदिल ट्रेडिंग से साबूदाना और कृष्णा सुपर मार्ट से तुअर की दाल के सैंपल भी एकत्र किए गए। सभी सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं, और रिपोर्ट आने के बाद अगर किसी भी सैंपल में कोई भी अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस छापेमारी के बाद शहर के बाजारों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई दुकानदार अपनी दुकानों को बंद कर मौके से भाग खड़े हुए, जबकि अन्य व्यापारियों में भय और घबराहट का माहौल देखा गया। खाद्य विभाग की इस सख्त कार्रवाई ने व्यापारियों को खाद्य सुरक्षा के नियमों के प्रति सचेत कर दिया है और शहर में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर नया सरगर्म माहौल बना दिया है।खाद्य सुरक्षा को लेकर सरकार की नियमावली:भारत में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 (Food Safety and Standards Act, 2006) को लागू किया है, जिसका उद्देश्य जनता को सुरक्षित, स्वच्छ और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य सामग्री प्रदान करना है। इस अधिनियम के तहत खाद्य विभाग ने विभिन्न नियमों और मानकों को निर्धारित किया है, जिनका पालन करना प्रत्येक खाद्य व्यवसायी के लिए अनिवार्य है।
1. खाद्य सामग्री का मानक:सभी खाद्य पदार्थों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होना चाहिए। इनमें खाद्य सामग्री के घटक, उनकी मात्रा, संरचना और पैकेजिंग से जुड़े मानक शामिल हैं।FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) द्वारा तय किए गए मानकों के अनुसार, खाद्य सामग्री में किसी भी तरह के हानिकारक रसायन, मिलावट या कीटाणु नहीं होने चाहिए।2. स्वच्छता और सुरक्षा:खाद्य सामग्री बनाने और बेचने के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखना आवश्यक है। खाद्य व्यवसायी को यह सुनिश्चित करना होता है कि उनके उत्पाद में किसी भी प्रकार का प्रदूषण, गंदगी या हानिकारक तत्व ना हो।सभी खाद्य सामग्री को साफ और सुरक्षित स्थानों पर स्टोर किया जाना चाहिए।3. खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण:प्रत्येक खाद्य व्यवसायी को FSSAI से खाद्य लाइसेंस या पंजीकरण प्राप्त करना आवश्यक है। बिना लाइसेंस के खाद्य सामग्री का उत्पादन और विक्रय कानूनी रूप से निषिद्ध है।खाद्य सुरक्षा अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करते हैं और यदि व्यवसायी के पास लाइसेंस नहीं है या वह मानकों का पालन नहीं कर रहा है, तो दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।
4. सैंपलिंग और परीक्षण:खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी समय-समय पर विभिन्न दुकानों और उत्पादन इकाइयों से खाद्य सामग्री के सैंपल लेते हैं और उनकी गुणवत्ता की जांच करते हैं। यह जांच यह सुनिश्चित करने के लिए की जाती है कि सामग्री में किसी भी प्रकार की मिलावट, रासायनिक तत्व या हानिकारक बैक्टीरिया ना हो।5. दंडात्मक कार्रवाई:यदि जांच के दौरान किसी उत्पाद में अनियमितता या मिलावट पाई जाती है, तो उसे जब्त किया जा सकता है। इसके अलावा, संबंधित दुकानदार या व्यवसायी के खिलाफ जुर्माना, कानूनी कार्रवाई, या लाइसेंस रद्द करने जैसे दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।यदि खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होते हैं, तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाती है और इसे बाजार से हटा दिया जाता है।6. खाद्य सुरक्षा और जागरूकता:सरकार और खाद्य सुरक्षा विभाग नियमित रूप से लोगों को खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के बारे में जागरूक करने के लिए अभियान चलाते हैं। इन अभियानों के माध्यम से उपभोक्ताओं को यह बताया जाता है कि वे किस प्रकार सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री का चयन करें।निष्कर्ष: सरकार की खाद्य सुरक्षा नियमावली उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री प्रदान करने के लिए बनाई गई है। इसके माध्यम से न केवल खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाती है, बल्कि व्यापारियों को भी जिम्मेदार बनाया जाता है ताकि वे किसी भी तरह के मिलावट या हानिकारक तत्वों से बचें।
