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शहडोल की जिया अज़ीम ने दसवीं में 96.2% अंक प्राप्त कर रचा कीर्तिमान, अनुशासन और आत्मविश्वास बनी सफलता की चाबी – YES NEWS

शहडोल की जिया अज़ीम ने दसवीं में 96.2% अंक प्राप्त कर रचा कीर्तिमान, अनुशासन और आत्मविश्वास बनी सफलता की चाबी


शहडोल | पत्रकार विनय की रिपोर्ट।


शहर की शैक्षणिक उपलब्धियों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। गुड शेफर्ड कॉन्वेंट स्कूल, शहडोल की छात्रा जिया अज़ीम ने मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की दसवीं बोर्ड परीक्षा में 96.2 प्रतिशत अंक अर्जित कर अपनी मेहनत, प्रतिबद्धता और समर्पण का अद्भुत परिचय दिया है।

एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली जिया ने यह साबित कर दिया कि संसाधनों से अधिक महत्व आत्मनियंत्रण, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प का होता है।




सपनों को आकार देने वाली सोच

जिया अज़ीम, शहडोल के इतवारी मोहल्ले स्थित सौदागर कैंपस की निवासी हैं। उनके पिता मोहम्मद अज़ीम एक व्यवसायी हैं और माता माजदा खातून एक समर्पित गृहिणी हैं। घर का वातावरण सकारात्मक, सहयोगी और शिक्षा के लिए प्रेरक रहा, जिसने जिया के व्यक्तित्व को निखारने में अहम भूमिका निभाई।




प्रतिदिन की सादगी में छुपा था सफलता का राज

जिया का पढ़ाई का तरीका अत्यंत सहज, किंतु सटीक रहा। उन्होंने प्रतिदिन 3 से 4 घंटे की स्व-अध्ययन योजना अपनाई और विषयों की गहराई तक जाकर अध्ययन किया। सोशल मीडिया और मोबाइल से दूरी बनाकर उन्होंने अपने ध्यान को भटकने से बचाया।


उनका कहना है —
“सच में पढ़ना है, तो पहले डिस्ट्रैक्शन से दूरी बनानी होगी।”

उन्होंने ऑफलाइन कोचिंग, यूट्यूब जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, और विद्यालय की कक्षाओं के माध्यम से पढ़ाई को बहुआयामी दृष्टिकोण से अपनाया।




गौरव की शिक्षायात्रा: विषयों में महारत

जिया को सामाजिक विज्ञान में 98 अंक और सूचना प्रौद्योगिकी में 99 अंक प्राप्त हुए। वे किसी भी विषय को कठिन नहीं मानतीं, क्योंकि उनका दृष्टिकोण है —
“यदि रुचि के साथ पढ़ा जाए, तो विषय स्वयं सरल हो जाता है।”




विद्यालय और शिक्षक: मार्गदर्शन के आदर्श स्तंभ

गुड शेफर्ड कॉन्वेंट स्कूल जिया की सफलता की नींव रहा। विद्यालय का अनुशासित वातावरण, समर्पित शिक्षकवृंद और शैक्षणिक संसाधन उनके संपूर्ण विकास में सहायक रहे।

ज़ुफिशां मैम, दीपिका मैम और जूली मैम उनके लिए केवल शिक्षिकाएं नहीं, बल्कि प्रेरणा स्रोत रहीं, जिन्होंने उन्हें समय-समय पर प्रोत्साहित किया और आत्मविश्वास प्रदान किया।

विद्यालय ने उनकी उपलब्धि को सराहते हुए स्कूल की आधिकारिक वेबसाइट पर उनका नाम प्रकाशित किया, जो उनके लिए गौरव का क्षण रहा।




परिवार: संबल और संजीवनी शक्ति

जिया अपनी सफलता का संपूर्ण श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं। उनके पिता न केवल आर्थिक रूप से, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी उनके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत रहे। साथ ही, उनके कजिन भाई, जो एक वर्ष पूर्व बोर्ड परीक्षा दे चुके थे, ने उन्हें व्यावहारिक मार्गदर्शन देकर पढ़ाई की दिशा को मजबूत किया।




भविष्य की दृष्टि: गणित की गहराइयों में उड़ान

जिया ने कक्षा 11वीं में विज्ञान संकाय (फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स) का चयन किया है। वे भविष्य में गणित विषय में उच्च शिक्षा प्राप्त कर न केवल अपने कैरियर को एक नई ऊंचाई देना चाहती हैं, बल्कि देश की एक जिम्मेदार और प्रगतिशील नागरिक बनना चाहती हैं।
“मेरे लिए शिक्षा केवल कैरियर नहीं, एक साधना है,” वे कहती हैं।




बहुआयामी प्रतिभा की धनी

पढ़ाई के साथ-साथ जिया एंकरिंग, कमेंट्री, निबंध लेखन और बास्केटबॉल जैसी सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में भी सक्रिय रही हैं। वे खाली समय में किताबें पढ़ना, आत्मविश्लेषण करना और नई चीजें सीखना पसंद करती हैं।




शब्दों में संकल्प: अगली पीढ़ी के लिए संदेश

> “सपनों को साकार करने के लिए जरूरी है आत्मविश्वास, नियमित अभ्यास और संयम।
सफलता शॉर्टकट से नहीं, लगातार प्रयास से मिलती है।
अपने भीतर के विद्यार्थी को जागृत कीजिए और लक्ष्य पर केंद्रित रहिए।”


जिया अज़ीम





जिया अज़ीम की यह यात्रा उस नई पीढ़ी का प्रतीक है जो पढ़ाई को बोझ नहीं, अवसर मानती है।
उनकी कहानी हमें सिखाती है कि आधुनिक युग में डिस्ट्रैक्शन जितने तेज़ हैं, आत्मसंयम उतना ही आवश्यक है।

शहडोल की इस प्रतिभा ने जो मुकाम हासिल किया है, वह न केवल जिले, बल्कि प्रदेश भर के छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
जिया अज़ीम — एक नाम, एक सोच और एक संकल्प — जिसने यह सिद्ध किया कि यदि दिशा सही हो, तो हर मंज़िल आसान है।

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