शहडोल, म.प्र.।
भूतपूर्व सैनिक संगठन, जिला शहडोल द्वारा आगामी सप्ताहों में दो अत्यंत महत्वपूर्ण आयोजनों की योजना बनाई गई है। संगठन के अध्यक्ष श्री जे.पी. गुप्ता द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह आयोजन न केवल प्रशासनिक और सैन्य सम्मान को समर्पित होंगे, बल्कि संगठनात्मक एकजुटता और संवेदनशीलता का भी प्रतीक होंगे।
—
1. दायित्व ग्रहण एवं शपथ समारोह: 21 जून से पूर्व आयोजन प्रस्तावित
भूतपूर्व सैनिक संगठन, शहडोल में नवीन दायित्व संभालने वाले पदाधिकारियों के लिए 21 जून से पूर्व शपथ/दायित्व ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा।
इस गरिमामयी कार्यक्रम में जिलाधीश, पुलिस अधीक्षक सहित सैनिक कल्याण बोर्ड शहडोल के प्रभारी अधिकारी ले. कर्नल (से.नि.) श्री धीरेंद्र कुमार को ससम्मान आमंत्रित करने की योजना है।
—
2. ले. कर्नल (से.नि.) धीरेंद्र कुमार के सेवानिवृत्ति पर विदाई समारोह
दिनांक 21 जून को जिले के सैनिक कल्याण अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल श्री धीरेंद्र कुमार सेवानिवृत्त हो रहे हैं।
उन्होंने अपनी सौजन्यता, संवेदनशीलता और कार्यदक्षता से जिले के सभी भूतपूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीदों के परिजनों की समस्याओं का न सिर्फ समाधान किया, बल्कि उन्हें सम्मान और सहयोग भी दिया।
इसलिए संगठन द्वारा उनके सम्मान में एक विशेष विदाई समारोह आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
—
संगठन के भीतर समरसता और आत्ममंथन की ज़रूरत: अध्यक्ष का भावनात्मक संदेश
संगठन के अध्यक्ष श्री जे.पी. गुप्ता ने पदाधिकारियों और सदस्यों को संबोधित करते हुए एक सच्चा आत्ममंथन प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
> “मैं देख रहा हूँ कि संगठन के कई सदस्य और पदाधिकारी व्यक्तिगत अहंकार (Ego) में उलझे हुए हैं। हम सबने सेना में अनुशासन और समर्पण सीखा है, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद कुछ लोग अभी भी अपने पूर्व पद की छाया से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।”
> “संगठन को आगे बढ़ाने के लिए हमें छोटे-छोटे मतभेद भुलाकर एकजुट होना होगा। यदि मेरे किसी भी शब्द या व्यवहार से किसी को ठेस पहुंची हो, तो मैं पूरी विनम्रता से क्षमा चाहता हूं। मैं रहूं या न रहूं, संगठन रहना चाहिए — और सक्रिय रहना चाहिए।”
—
सदस्यों से सुझाव की अपील
इन दोनों कार्यक्रमों की रूपरेखा को अंतिम रूप देने से पहले अध्यक्ष जे.पी. गुप्ता ने सभी सदस्यों और पदाधिकारियों से अपने सुझाव और विचार शीघ्र साझा करने की अपील की है, ताकि आयोजन गरिमामय और समरसता भरा हो।
—
यह आयोजन केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि एकजुटता, कृतज्ञता और संगठनात्मक चेतना का प्रतीक बन सकता है — बशर्ते हम सब एक स्वर में आगे बढ़ें।
—
