जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने समर्थकों के साथ बैठे धरने में

अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में अभी भी धरने पर बैठे हैं। उनके शिष्य और समर्थक भी साथ बैठे हैं। इस दौरान भजन गाए जा रहे हैं।
वहीं, शंकराचार्य ने मौन व्रत धारण कर लिया है। वह किसी से बातचीत नहीं कर रहे। पालकी पर उसी अवस्था में बैठे हैं, जहां पुलिस छोड़कर गई थी।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अभी भी मौन धारण कर धरने पर बैठे हैं। उन्होंने अन्न-जल का त्याग कर दिया है। शंकराचार्य का कहना है कि जब तक प्रशासन उन्हें सम्मानपूर्वक नहीं ले जाता, तब तक वे धरनास्थल से नहीं उठेंगे।
आपको बता दें कि,प्रयागराज माघ मेले में रविवार को मौनी अमावस्या के स्नान के लिए आए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे।
इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने एक साधु को चौकी में पीटा।
इससे शंकराचार्य नाराज हो गए और शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। करीब 2 घंटे तक गहमा-गहमी रही।
इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए।
इस पूरे मामले से नाराज शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक पुलिस प्रशासन ससम्मान प्रोटोकॉल के साथ नहीं ले जाएगा, तब तक गंगा स्नान नहीं करूंगा।
