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अमानत में खयानत करने वाले सावधान, ईश्वरीय भय में बिताएं जीवन - YES NEWS

अमानत में खयानत करने वाले सावधान, ईश्वरीय भय में बिताएं जीवन

अमानत में खयानत करने वाले सावधान, ईश्वरीय भय में बिताएं जीवन: प्रेरित डा. अंकुर यूसफ़ नरूला जी
-वीरवार की विशेष सभा के दौरान पास्टरों और सेवादारों को दी सख्त हिदायत,
-शैतानी युक्तियों के विनाश के लिए मंगलवार शाम 5 बजे से होगी ‘पूरी रात की प्रार्थना’—-
फरीदकोट/ जालंधर  (एलेक्स डिसूजा): खांबड़ा स्थित चर्च के मुख्य प्रेरित डा. अंकुर यूसफ़ नरूला जी ने पिछले चार सप्ताहों से चल रही विशेष संदेशों की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए पास्टरों और चर्च के सेवादारों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने ‘अमानत में खयानत’ करने वालों को आगाह करते हुए कहा कि ईश्वरीय कार्यों में ईमानदारी ही आत्मिक उन्नति का एकमात्र मार्ग है।
अज्ञानता और लालच का त्याग करें:
प्रेरित जी ने क्रूस पर प्रभु यीशु मसीह के शब्दों, “हे पिता इन्हें क्षमा कर क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं” का संदर्भ देते हुए कहा कि आज भी कई लोग अज्ञानता या सांसारिक लालच के वश में होकर आत्मिक मार्ग से भटक रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चर्च और प्रभु के घर से जुड़े सेवकों को अपनी आत्मा को पहचानना चाहिए और सांसारिक वस्तुओं के बजाय ईश्वरीय भय (Fear of God) में जीवन व्यतीत करना चाहिए।
मंगलवार को होगी ‘विशाल प्रार्थना सभा’:
आध्यात्मिक गिरावट को रोकने और दुष्ट की युक्तियों को विफल करने के उद्देश्य से प्रेरित जी ने आगामी मंगलवार शाम 5 बजे से पूरी रात की प्रार्थना का आह्वान किया है। इस सभा का मुख्य उद्देश्य कलीसियाओ को ‘डिवाइन विजडम’ (दैवीय बुद्धि) प्रदान करना है ताकि लोग शैतानी चालों को समझ सकें। उन्होंने इसे उन लोगों के लिए एक अंतिम ‘अलार्म’ बताया जो प्रभु के कार्यों में बाधा बन रहे हैं।
मुख्य आध्यात्मिक बिंदु:
-आत्मिक सुधार: जीवन को आध्यात्मिक अनुशासन में ढालना अनिवार्य है।
-डिवाइन विजडम: शैतानी चालों से बचने के लिए ईश्वरीय ज्ञान का होना जरूरी।
-स्वर्गीय आनंद: न्याय के दिन स्वर्ग का वारिस बनने के लिए धरती पर परमेश्वर की योजनाओं को समझना आवश्यक है।
विशेष चर्चा: क्या है ‘अलौकिक अभिव्यक्ति’ (Supernatural Manifestation)?
वीरवार के प्रचार का खुलासा करते हुए प्रेरित जी ने ‘अलौकिक अभिव्यक्ति’ को भौतिक और आध्यात्मिक संसार के बीच का सेतु बताया। उन्होंने इसके विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला:
1. प्रकृति: यह वैज्ञानिक नियमों से परे एक रूहानी घटना है जो तर्क को चुनौती देती है।
2. उद्देश्य: ईश्वरीय महिमा को प्रकट करना और मानवीय विश्वास को मजबूत करना।
3. माध्यम: यह दर्शन, सपनों, चंगाई और पवित्र आत्मा के उपहारों के रूप में प्रकट होती है।
4. प्राप्ति: प्रेरित जोशुआ सेलमैन और क्रेफ्लो डॉलर जैसे आध्यात्मिक गुरुओं के अनुसार, ये वास्तविकताएं केवल ‘विश्वास’ (Faith) के माध्यम से ही भौतिक रूप धारण करती हैं।
निष्कर्ष: प्रेरित अंकुर यूसफ़ नरूला जी ने सभी विश्वासियों को इस मंगलवार की प्रार्थना में शामिल होने का निमंत्रण दिया है, ताकि वे अपने जीवन को नई दिशा दे सकें और ईश्वरीय सामर्थ्य का अनुभव कर सकें।

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