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“पोरसा को कब मिलेगा अपना विधानसभा क्षेत्र? परिसीमन की माँग ने पकड़ा जोर!” – YES NEWS

“पोरसा को कब मिलेगा अपना विधानसभा क्षेत्र? परिसीमन की माँग ने पकड़ा जोर!”




पोरसा (मुरैना): विनय द्वारा रूपांतरित खबर।


विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया वर्षों से लंबित है, और इसका सीधा असर विकास की दिशा में पिछड़ते क्षेत्रों पर पड़ रहा है। ऐसा ही एक क्षेत्र है पोरसा, जो लंबे समय से अंबाह विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है, लेकिन जनसंख्या और मतदाताओं की संख्या को देखते हुए अब यह सवाल उठने लगा है — पोरसा को अलग विधानसभा क्षेत्र का दर्जा कब मिलेगा?

वर्षों से लंबित है परिसीमन

मौजूदा समय में विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन को लेकर प्रदेश में गंभीर चर्चाएं हो रही हैं। कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन अब तक परिसीमन की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। देश की जनसंख्या और मतदाता संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है, लेकिन निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा वहीं की वहीं है। उदाहरण के तौर पर अंबाह विधानसभा क्षेत्र में दो विधानसभा क्षेत्रों के बराबर मतदाता हैं, इसके बावजूद इस क्षेत्र का पुनर्गठन नहीं किया गया।

स्थानीय स्तर पर उठ रही है माँग

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों द्वारा पोरसा को अलग विधानसभा क्षेत्र घोषित करने की माँग लगातार उठाई जा रही है।

महावीर जैन, अध्यक्ष, व्यापार संघ पोरसा, ने कहा:

> “एक विधानसभा क्षेत्र में औसतन एक लाख मतदाता होते हैं, लेकिन अंबाह में यह संख्या दो लाख से भी अधिक है। बावजूद इसके पोरसा को अलग क्षेत्र का दर्जा नहीं दिया गया है, जो अन्यायपूर्ण है। परिसीमन कर पोरसा को अलग विधानसभा बनाया जाना चाहिए।”



बैध राधाकृष्ण गुप्ता, समाजसेवी, ने बताया:

> “अगर पोरसा अलग विधानसभा क्षेत्र बनता है, तो क्षेत्र के विकास के लिए अलग विधायक निधि निर्धारित होगी, जिससे पोरसा का समुचित और लक्ष्य आधारित विकास संभव होगा।”



राम विनोद शुक्ला, प्राचार्य एवं ज्योतिषाचार्य, का मानना है:

> “संविधान के अनुसार हर 20 से 25 वर्ष में परिसीमन आवश्यक है। लेकिन विडंबना यह है कि अंबाह क्षेत्र को बने 50 से अधिक वर्ष हो चुके हैं और अब तक परिसीमन नहीं हुआ। यह अत्यंत आवश्यक है कि पोरसा को अलग से विधानसभा क्षेत्र बनाया जाए।”



रामकिशोर तिवारी धनेटा, ग्रामीण नेता, ने भी समर्थन व्यक्त करते हुए कहा:

> “अगर पोरसा को अलग विधानसभा क्षेत्र बनाया जाता है तो स्थानीय विधायक की निधि सीधे इस क्षेत्र के विकास में खर्च होगी। इससे सड़कों, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हो सकेगा।”



क्या शासन देगा ध्यान?

अब जब नागरिकों की आवाज़ मुखर हो रही है और जनसंख्या व संसाधनों का असंतुलन साफ दिखाई दे रहा है, यह शासन और निर्वाचन आयोग के लिए चिंतन का विषय बन गया है। जनता को उम्मीद है कि जल्द ही परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होगी और पोरसा को उसका संवैधानिक अधिकार — अलग विधानसभा क्षेत्र — प्रदान किया जाएगा।


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