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Dharmendra की आखिरी वसीयत ने सबको रुला दियाधर्मेंद्र की वसीयत: – YES NEWS

Dharmendra की आखिरी वसीयत ने सबको रुला दिया
धर्मेंद्र की वसीयत:

सीलबंद लिफ़ाफ़ा खुलते ही परिवार में सन्नाटा | Dharmendra की आखिरी वसीयत ने सबको रुला दिया
धर्मेंद्र की वसीयत: प्यार और सम्मान का अंतिम संदेश
प्रारंभ



24 नवंबर 2025 को जब धर्मेंद्र ने इस दुनिया को अलविदा कहा, तो उनके निधन ने भारतीय सिनेमा के साथ-साथ उनके परिवार को भी गहरे सदमे में डाल दिया। 89 साल की उम्र में उनका जाना केवल एक अभिनेता का नहीं, बल्कि एक पिता, पति और एक इंसान का भी अंत था। उनके घर में जो तनाव और भावनाएं उभरीं, वह सचमुच हर किसी को हैरान कर गईं। लेकिन उनके निधन के बाद जब उनके परिवार ने एक सील बंद लिफाफा खोला, तो उसमें छिपे शब्दों ने सबको झकझोर दिया।

वसीयत का खुलासा

धर्मेंद्र की वसीयत एक ऐसा दस्तावेज था, जिसमें उनके अंतिम विचार, प्यार, डर और पछतावा समाहित थे। जब उनके परिवार ने वह लिफाफा खोला, तो सबकी सांसें थम गईं। यह एक साधारण कागज नहीं था, बल्कि यह एक ऐसे इंसान के विचार थे जिसने दो परिवारों के बीच संतुलन बनाए रखा। वसीयत में सबसे पहला नाम उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर का था। धर्मेंद्र ने साफ लिखा था कि उनकी आधी संपत्ति प्रकाश कौर और उनके चारों बच्चों—सनी, बॉबी, अजीता और विजेता को दी जाए।

यह पढ़ते ही प्रकाश कौर और उनके बच्चों के चेहरे पर राहत की एक धीमी हवा दौड़ गई। सालों से उनके दिल में एक डर था कि क्या पिता दूसरी शादी के बाद उन्हें भी बराबरी का हक देंगे। लेकिन धर्मेंद्र ने अपनी लिखावट से उस डर को मिटा दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि यही उनका पहला परिवार है और उनका हक सबसे पहले है। यह लाइन उस घाव को भरने का काम कर गई, जिसे प्रकाश कौर और उनके बच्चों ने सालों तक सहा था।

दूसरी पत्नी और बेटियों का सम्मान

लेकिन माहौल की हवा अचानक तब बदल गई जब अगली लाइन पढ़ी गई। धर्मेंद्र ने अपनी बाकी आधी संपत्ति हेमा मालिनी और उनकी दोनों बेटियों ईशा और आहाना को देने की बात लिखी थी। यह सुनते ही कमरे में एक अजीब सी खामोशी फैल गई। सभी की नजरें हेमा पर टिक गईं। उनकी आंखें भर आईं, होंठ कांपने लगे। हेमा ने कभी धन के लिए कुछ नहीं मांगा था। उन्होंने हमेशा कहा कि उन्हें बस धर्म जी का साथ और सम्मान चाहिए। लेकिन आज धर्मेंद्र की इस वसीयत ने उन्हें ऐसा सम्मान दिया जिसे उन्होंने कभी मांगा भी नहीं था।

ईशा और आहाना तुरंत अपनी मां का हाथ पकड़कर खड़ी हो गईं। उन्होंने अपनी मां के उन अनकहे दर्दों को देखा था जिन्हें शायद ही कोई समझ पाया हो। उन्होंने देखा था कि उनकी मां ने कितनी मर्यादा में रहकर हर रिश्ते को निभाया। कभी किसी के सामने शिकायत नहीं की। लेकिन आज उनके पिता ने सबके सामने यह दिखा दिया कि वह अपने दूसरे परिवार को भी उतना ही प्यार करते हैं।

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