35 बार रक्तदान कर चुकीं समाजसेवी रूपाली सिंघई ने विश्व रक्तदाता दिवस पर साझा कीं अपनी प्रेरणादायक बातें
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🩷 प्रस्तावना:
विश्व रक्तदाता दिवस के अवसर पर हम मिलवाते हैं आपको रूपाली सिंघई से — एक समर्पित रक्तदाता, संवेदनशील समाजसेवी और दिशा वेलफेयर संस्था की अध्यक्ष। जिनके लिए रक्तदान सिर्फ जरूरतमंदों की मदद नहीं, बल्कि आत्मिक संतुलन और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है। अब तक 35 बार रक्तदान कर चुकी रूपाली जी ना केवल स्वयं उदाहरण पेश करती हैं, बल्कि हजारों युवाओं, महिलाओं और ग्रामीणों को रक्तदान की प्रेरणा भी दे चुकी हैं। उनके साथ हुई विशेष बातचीत में उन्होंने रक्तदान से जुड़े अनुभव, चुनौतियाँ और अपनी भावनाएँ साझा कीं — जो हर पाठक को मानवीय मूल्यों की गहराई से जोड़ती हैं।
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✍️ विशेष बातचीत: रूपाली सिंघई से
1. आप रक्तदाता और समाजसेवी दोनों ही रूप में सक्रिय हैं, आपके लिए रक्तदान का क्या खास महत्व है?
रक्तदान मेरे लिए सिर्फ एक सेवा नहीं, बल्कि एक संस्कार है। यह ऐसा कर्तव्य है जिससे न केवल किसी जरूरतमंद को जीवन मिलता है, बल्कि मुझे भी आत्मिक शांति और ऊर्जा मिलती है। जब भी मैं रक्तदान करती हूँ, मुझे लगता है जैसे मैंने किसी अनजाने को नया जीवन दिया है। अब तक मैं 35 बार रक्तदान कर चुकी हूँ।
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2. अध्यक्ष के रूप में आपने रक्तदान के क्षेत्र में अब तक कौन-कौन से बड़े कदम उठाए हैं?
दिशा वेलफेयर के माध्यम से हमने थैलेसीमिया और सिकलसेल से पीड़ित बच्चों के लिए विशेष रक्तदान शिविर आयोजित किए। साथ ही HLA टेस्टिंग कैंप, प्रीनेटल टेस्टिंग, वार्ड्स में थैला पंप की उपलब्धता, दिव्यांग कार्ड और बस पास जैसी कई व्यवस्थाएं कीं। हमने 24×7 रक्त सहायता टीम भी गठित की है, जो आवश्यकता पड़ने पर त्वरित रक्तदाता को पहुंचाती है।
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3. महिलाओं को रक्तदान के लिए प्रेरित करने में आपकी सबसे बड़ी चुनौतियाँ क्या रही हैं?
महिलाओं में रक्तदान को लेकर भय और भ्रांतियाँ प्रमुख चुनौतियाँ रही हैं—जैसे रक्तदान से कमजोरी आ जाती है या यह महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है। हमने इन भ्रांतियों को तोड़ने के लिए सफल उदाहरण प्रस्तुत किए और उन्हें बताया कि महिलाएं भी रक्तवीरांगनाएँ बन सकती हैं।
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4. समाज में रक्तदान को लेकर फैली गलतफहमियों को दूर करने के लिए आप क्या प्रयास कर रही हैं?
हम लगातार शैक्षणिक वर्कशॉप, डॉक्टरों के सेमिनार और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से यह स्पष्ट करते हैं कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है। मिथकों को तथ्यों से तोड़ने के लिए हम विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ मिलकर संवाद करते हैं।
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5. आपके संगठन के प्रमुख कार्यक्रम कौन-कौन से हैं, जो रक्तदान को बढ़ावा देते हैं?
हम ‘रक्तदान महादान अभियान’ के अंतर्गत स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाते हैं। थैलेसीमिया और सिकलसेल पर जागरूकता कार्यक्रम, प्रेरणा शिविर, और ‘रक्तदाता सम्मान समारोह’ जैसे आयोजनों के ज़रिए हम रक्तदाताओं को सामाजिक मान्यता और गौरव प्रदान करते हैं।
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6. युवाओं को इस मुहिम से जोड़ने के लिए आपकी रणनीति क्या है?
हमने कॉलेजों में नुक्कड़ नाटक, सोशल मीडिया चैलेंज, और युवा रक्तवीर सम्मान जैसे कार्यक्रम शुरू किए हैं। युवाओं की टीम बनाकर उन्हें स्वयं नेतृत्व की भूमिका दी जाती है, ताकि वे सिर्फ सहभागी न बनें, बल्कि समाज में प्रेरक की भूमिका निभाएं।
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7. कोई ऐसा अनुभव जो आज भी आपकी प्रेरणा बना हुआ है?
एक बार देर रात एक मरीज को A पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता थी। मैंने रात 11 बजे जाकर रक्तदान किया। उसकी माँ ने मेरी आंखों में देखकर जो आशीर्वाद दिया, वह सिर्फ “धन्यवाद” नहीं था—वह एक ऐसा भाव था जिसने मुझे यह यकीन दिलाया कि यही मेरा मार्ग है, और यही मेरी सेवा की दिशा।
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8. आगामी विश्व रक्तदाता दिवस पर आप आम जनता को क्या संदेश देना चाहेंगी?
मैं सभी से यही कहना चाहती हूं — रक्तदान सिर्फ दान नहीं, जीवन की सबसे सुंदर सौगात है। आप किसी अजनबी के लिए ईश्वर का भेजा हुआ फ़रिश्ता बन सकते हैं। 14 जून को एक यूनिट रक्त देकर किसी को जीवन और किसी परिवार को मुस्कान दीजिए।
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रूपाली सिंघई जैसी महिलाओं की मौजूदगी हमें यह विश्वास दिलाती है कि समाज में परिवर्तन संभव है — बशर्ते हम कदम उठाएं। रक्तदान सिर्फ अस्पताल की ज़रूरत नहीं, यह हमारी मानवीयता की पहचान है। इस विश्व रक्तदाता दिवस पर आइए, हम भी अपने भीतर के नायक को जगाएं और किसी के जीवन की आशा बनें।
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