“पिता: छांव भी, आधार भी”

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जब कभी जिंदगी की तपती धूप थका देती है, तब एक साया होता है जो चुपचाप हमारे ऊपर अपनी छांव फैलाए रहता है — वो साया है पिता का।


पिता, एक ऐसा शब्द जो मजबूती, जिम्मेदारी, त्याग और अटूट प्रेम का प्रतीक है। फादर्स डे उन अनकहे जज़्बातों को शब्दों में बयां करने का अवसर है, जो हम अक्सर दिल में ही दबाए रखते हैं।

पिता वह हैं जो बिना कहे हमारे लिए दुनिया से लड़ते हैं। वो जो खुद टूटी छत के नीचे रह लेते हैं, लेकिन हमारे लिए छत और चारदीवारी का पूरा ख्वाब बुनते हैं। बचपन में जब हम गिरते हैं, मां की ममता जहां आंसू पोंछती है, वहीं पिता की मजबूत उंगली हमें फिर खड़ा होना सिखाती है।

वे हमेशा हमारी आंखों में भविष्य देख लेते हैं — हमें खुद से आगे बढ़ा देने का ख्वाब हर दिन देखते हैं। उनका प्यार बहुत गहरा होता है, पर अक्सर चुप। वो न फूलों की तरह दिखता है, न बारिश की तरह बरसता है, लेकिन उसकी मौजूदगी हर लम्हा जीवन में महसूस होती है — बिलकुल उस जड़ की तरह जो पेड़ को जीवन देती है, पर दिखती नहीं।

आज जब हम फादर्स डे मना रहे हैं, यह केवल एक कार्ड देने या एक उपहार थमाने का दिन नहीं है। यह वह दिन है जब हमें उनके संघर्ष, त्याग और उस निःस्वार्थ प्रेम को पहचानने की जरूरत है, जिसे उन्होंने कभी जताया नहीं — सिर्फ जिया है।




💬 एक पिता के लिए दो पंक्तियाँ:

> “हाथ थामकर चलना सिखाया, खुद हर मुश्किल में मुस्कराया,
वो ना कह सका जो मां कहती थी रोज़, पर उसका हर काम प्यार जताता था।”






इस फादर्स डे पर अपने पिता को सिर्फ “धन्यवाद” ही मत कहिए,
बल्कि उनके पास बैठिए, उनसे बातें कीजिए, और कहिए —
“पापा, आप ही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं।”



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